कश्मीर वैली
किसी कटोरे की तरह लगता है, याने सेंटर में फ्लैट और साइड्स में ऊंची पहाड़ियां।
ऐसे में युद्ध हो, ऊंची पहाड़ी में बैठा पक्ष, बेहद लाभ में होता है। क्योकि नीचे से ऊपर की तरफ, निशाना लगाकर, आड़ में बैठे दुश्मन को मारना कठिन होता है।
लेकिन ऊपर बैठा एक आदमी नीचे हर गतिविधि को निगाह में रखता है। ऊपर बैठे एक के बदले नीचे से 20 सैनिक लगते है।
●●
इलाज है- हवाई जहाज से बमबारी, तोप से शेलिंग, रात में हमला। और इन्ही तरीको से हमने करगिल लड़ा।
प्रोग्रेस बेहद धीमी रही। एटमी ताकत, तीन ट्रिलियन इकॉनमी भारत को, अपनी बोफोर्स और सुखोई से सुसज्जित आधुनिक 14 लाख की भारतीय फौज के साथ 100 से कम पहाड़ जीतने में 5 महीने लगे।
500 से ज्यादा फौजी मारे गए। इसके बाद भी कुछ पॉइंट्स हम कभी जीत नही पाए, यह तब की सरकार प्रचारित नही करती।
लेकिन आपसे विजय दिवस जरूर मनाती है।
●●
नाउ बैक टू 1947
अक्टूबर में कश्मीर राजा ने जब एक्सेशन किया, तब गिलगिट बाल्टिस्तान उससे टूटकर ऑलरेडी पाकिस्तान से मिल चुका था। विद्रोही तथा पकिस्तानी, ऑलरेडी श्रीनगर के दरवाजे पर खड़े थे।
थ्रीडी मैप देखिए। यह कटोरा दक्षिण में भारत की ओर से भी पहाड़ियों से बाधित है। याने वहां पहुचने की रोड नही थी। अंग्रेजो के दौर की रोड, पाकिस्तान होकर जाती थी, हमे उसका एक्सेस तो मिलता नहीं।
तो एयरफोर्स के जहाज से फौजी गए।
●●
एयरफोर्स याने सेकेंड वर्ल्ड वॉर के ब्रिटेन् के फेंके छोड़े छकड़ा प्रोपेलर प्लेन। उड़न रिक्शा समझ लीजिए। इसमे 15-20 फौजी बैठकर जाते।
श्रीनगर के कच्चे मिट्टी की हवाई पट्टी पर उतरते। 3 दिन में कुछ हजार फौजी पहुचे। तोप नही, टैंक नही, हल्के हथियार लेकर...
श्रीनगर से दुश्मन को भगाना शुरू किया। कटोरे का प्लेन तला जीत लिया। कश्मीर वैली तब से आपकी है।
●●
लेकिन जहां से पहाड़ियां शुरू होती है, पाकिस्तान एडवांटेज में आ जाता है।
तब तक दिसम्बर भी आ जाता है। बर्फ है, और दोनों तरफ की फौज बर्फ में लड़ने को ट्रेंड नही। सेनाध्यक्ष ( जो दोनों तरफ ब्रिटिश हैं) युद्ध विराम मांगते हैं।
जी हां, यह रिकार्ड पर है कि सेना ने युद्ध विराम मांगा, यह कहकर की सर्दियों में लड़ना सम्भव नही। तब की सरकार ने, अमेरिकन राष्ट्रपति के डर से युद्ध विराम नही किया था।
तो जहाँ युद्ध विराम हुआ, वही LOC है।
●●
जिसे आप POK कहते हैं, वह नीलम घाटी और मुजफ्फराबाद सहित 4 जिले, ऊपर गिलगिट बाल्टिस्तान है। इन इलाकों में हजारो पहाड़ हैं। 100 पहाड़ 1999 में जीतने में जिनको पसीना फूट गया,
आप हजारो पहाड़ 1947 में न जीतने पर स्यापा करते है।
●●
यह कश्मीर पाने की चिंता नही, यह घरेलू ऑडियंस के लिए खड़ा किया गया राजनीतिक नारा है।
क्योकि आंखों देखा सत्य यह है कि इस तरह की पहाड़ियों में वर्ल्ड पॉवर अमेरिका, 20 साल लड़कर अफगानिस्तान में नही जीत पाया। लाखो ड्रोन हमले, हजारो F-16 फ्लाइट्स, बड़े बम..
आप सोचते है कि मोदी शाह किसी दिन सेना के हाथ खोल दें, तो हफ्ते भर में PoK भारत का हो जायेगा।
इसलिए मैं हैशटैग #चूकादे का यूज करता हूँ।
●●
मसले का समाधान क्या है।
एक ही है।
यह 1 साल बाद हो, 10 साल बाद, 100 या 1000 साल बाद। यही होगा..
कि LOC बॉर्डर बनेगी। भारतीय कश्मीर कभी पाकिस्तान का नही होगा, और PoK कभी भारत का नही होगा।
मसला सुलझने पर पाक आर्मी का पाकिस्तान में महत्व घटेगा। दो देशों की टेंशन्स रिड्यूज होंगी। ट्रेड, टूरिज्म, पीपुल टू पीपुल कॉन्टेक्ट होगा। बार्डर वैसे ही इर्रिलेवेट हो जाएंगे जैसे स्विट्जरलैंड और बेल्जियम के बीच है।
बस कार उठाओ, इस पार-उस पार घूमते रहो।
●●
यह जब भी होगा, भारत पाक की आपसी, द्विपक्षीय सहमति से होगा। यहां हथियार बेचकर धन और प्रभुत्व कमाने वाला अमेरिका, और पाकिस्तान को हमारे लिए दूसरा मोर्चा बनाकर रखने का इच्छुक चीन,
कभी नही चाहेंगे कि शांति हो। समाधान हो।
तो #चूकादे से जो लोग दिन रात हिन्दू, मुसलमान, पाकिस्तान, PoK, मार देंगे, जान दे देंगे के नारो और युद्ध मे देशभक्ति खोजते है, वे बेसिकली अमेरिका और चीन के हित पूरे करते हैं।
वही नही, ऐसी सरकारे भी चीन और अमेरिका के हित ही पूरे करती हैं। फिर उनसे कर्जे लेती है, अपनों को ठेके दिलवाती है।
उनके मुकदमो में फेवरेबल फैसले भी दिलवाती है।
●●
अब देशभक्तों से सवाल यह है कि आप किसकी तरफ हैं??
भारत के..
या चीन और अमेरिका के?? टेक्नॉलजी के साथ इस तरह के थ्रीडी मैप निकल आये है। जिससे बातों को समझना आसान हो जाता है।
कश्मीर वैली का यह मैप देखिए।
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किसी कटोरे की तरह लगता है, याने सेंटर में फ्लैट और साइड्स में ऊंची पहाड़ियां।
ऐसे में युद्ध हो, ऊंची पहाड़ी में बैठा पक्ष, बेहद लाभ में होता है। क्योकि नीचे से ऊपर की तरफ, निशाना लगाकर, आड़ में बैठे दुश्मन को मारना कठिन होता है।
लेकिन ऊपर बैठा एक आदमी नीचे हर गतिविधि को निगाह में रखता है। ऊपर बैठे एक के बदले नीचे से 20 सैनिक लगते है।
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इलाज है- हवाई जहाज से बमबारी, तोप से शेलिंग, रात में हमला। और इन्ही तरीको से हमने करगिल लड़ा।
प्रोग्रेस बेहद धीमी रही। एटमी ताकत, तीन ट्रिलियन इकॉनमी भारत को, अपनी बोफोर्स और सुखोई से सुसज्जित आधुनिक 14 लाख की भारतीय फौज के साथ 100 से कम पहाड़ जीतने में 5 महीने लगे।
500 से ज्यादा फौजी मारे गए। इसके बाद भी कुछ पॉइंट्स हम कभी जीत नही पाए, यह तब की सरकार प्रचारित नही करती।
लेकिन आपसे विजय दिवस जरूर मनाती है।
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नाउ बैक टू 1947
अक्टूबर में कश्मीर राजा ने जब एक्सेशन किया, तब गिलगिट बाल्टिस्तान उससे टूटकर ऑलरेडी पाकिस्तान से मिल चुका था। विद्रोही तथा पकिस्तानी, ऑलरेडी श्रीनगर के दरवाजे पर खड़े थे।
थ्रीडी मैप देखिए। यह कटोरा दक्षिण में भारत की ओर से भी पहाड़ियों से बाधित है। याने वहां पहुचने की रोड नही थी। अंग्रेजो के दौर की रोड, पाकिस्तान होकर जाती थी, हमे उसका एक्सेस तो मिलता नहीं।
तो एयरफोर्स के जहाज से फौजी गए।
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एयरफोर्स याने सेकेंड वर्ल्ड वॉर के ब्रिटेन् के फेंके छोड़े छकड़ा प्रोपेलर प्लेन। उड़न रिक्शा समझ लीजिए। इसमे 15-20 फौजी बैठकर जाते।
श्रीनगर के कच्चे मिट्टी की हवाई पट्टी पर उतरते। 3 दिन में कुछ हजार फौजी पहुचे। तोप नही, टैंक नही, हल्के हथियार लेकर...
श्रीनगर से दुश्मन को भगाना शुरू किया। कटोरे का प्लेन तला जीत लिया। कश्मीर वैली तब से आपकी है।
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लेकिन जहां से पहाड़ियां शुरू होती है, पाकिस्तान एडवांटेज में आ जाता है।
तब तक दिसम्बर भी आ जाता है। बर्फ है, और दोनों तरफ की फौज बर्फ में लड़ने को ट्रेंड नही। सेनाध्यक्ष ( जो दोनों तरफ ब्रिटिश हैं) युद्ध विराम मांगते हैं।
जी हां, यह रिकार्ड पर है कि सेना ने युद्ध विराम मांगा, यह कहकर की सर्दियों में लड़ना सम्भव नही। तब की सरकार ने, अमेरिकन राष्ट्रपति के डर से युद्ध विराम नही किया था।
तो जहाँ युद्ध विराम हुआ, वही LOC है।
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जिसे आप POK कहते हैं, वह नीलम घाटी और मुजफ्फराबाद सहित 4 जिले, ऊपर गिलगिट बाल्टिस्तान है। इन इलाकों में हजारो पहाड़ हैं। 100 पहाड़ 1999 में जीतने में जिनको पसीना फूट गया,
आप हजारो पहाड़ 1947 में न जीतने पर स्यापा करते है।
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यह कश्मीर पाने की चिंता नही, यह घरेलू ऑडियंस के लिए खड़ा किया गया राजनीतिक नारा है।
क्योकि आंखों देखा सत्य यह है कि इस तरह की पहाड़ियों में वर्ल्ड पॉवर अमेरिका, 20 साल लड़कर अफगानिस्तान में नही जीत पाया। लाखो ड्रोन हमले, हजारो F-16 फ्लाइट्स, बड़े बम..
आप सोचते है कि मोदी शाह किसी दिन सेना के हाथ खोल दें, तो हफ्ते भर में PoK भारत का हो जायेगा।
इसलिए मैं हैशटैग #चूकादे का यूज करता हूँ।
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मसले का समाधान क्या है।
एक ही है।
यह 1 साल बाद हो, 10 साल बाद, 100 या 1000 साल बाद। यही होगा..
कि LOC बॉर्डर बनेगी। भारतीय कश्मीर कभी पाकिस्तान का नही होगा, और PoK कभी भारत का नही होगा।
मसला सुलझने पर पाक आर्मी का पाकिस्तान में महत्व घटेगा। दो देशों की टेंशन्स रिड्यूज होंगी। ट्रेड, टूरिज्म, पीपुल टू पीपुल कॉन्टेक्ट होगा। बार्डर वैसे ही इर्रिलेवेट हो जाएंगे जैसे स्विट्जरलैंड और बेल्जियम के बीच है।
बस कार उठाओ, इस पार-उस पार घूमते रहो।
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यह जब भी होगा, भारत पाक की आपसी, द्विपक्षीय सहमति से होगा। यहां हथियार बेचकर धन और प्रभुत्व कमाने वाला अमेरिका, और पाकिस्तान को हमारे लिए दूसरा मोर्चा बनाकर रखने का इच्छुक चीन,
कभी नही चाहेंगे कि शांति हो। समाधान हो।
तो #चूकादे से जो लोग दिन रात हिन्दू, मुसलमान, पाकिस्तान, PoK, मार देंगे, जान दे देंगे के नारो और युद्ध मे देशभक्ति खोजते है, वे बेसिकली अमेरिका और चीन के हित पूरे करते हैं।
वही नही, ऐसी सरकारे भी चीन और अमेरिका के हित ही पूरे करती हैं। फिर उनसे कर्जे लेती है, अपनों को ठेके दिलवाती है।
उनके मुकदमो में फेवरेबल फैसले भी दिलवाती है।
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अब देशभक्तों से सवाल यह है कि आप किसकी तरफ हैं??
भारत के..
या चीन और अमेरिका के?? टेक्नॉलजी के साथ इस तरह के थ्रीडी मैप निकल आये है। जिससे बातों को समझना आसान हो जाता है।
कश्मीर वैली का यह मैप देखिए।
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किसी कटोरे की तरह लगता है, याने सेंटर में फ्लैट और साइड्स में ऊंची पहाड़ियां।
ऐसे में युद्ध हो, ऊंची पहाड़ी में बैठा पक्ष, बेहद लाभ में होता है। क्योकि नीचे से ऊपर की तरफ, निशाना लगाकर, आड़ में बैठे दुश्मन को मारना कठिन होता है।
लेकिन ऊपर बैठा एक आदमी नीचे हर गतिविधि को निगाह में रखता है। ऊपर बैठे एक के बदले नीचे से 20 सैनिक लगते है।
●●
इलाज है- हवाई जहाज से बमबारी, तोप से शेलिंग, रात में हमला। और इन्ही तरीको से हमने करगिल लड़ा।
प्रोग्रेस बेहद धीमी रही। एटमी ताकत, तीन ट्रिलियन इकॉनमी भारत को, अपनी बोफोर्स और सुखोई से सुसज्जित आधुनिक 14 लाख की भारतीय फौज के साथ 100 से कम पहाड़ जीतने में 5 महीने लगे।
500 से ज्यादा फौजी मारे गए। इसके बाद भी कुछ पॉइंट्स हम कभी जीत नही पाए, यह तब की सरकार प्रचारित नही करती।
लेकिन आपसे विजय दिवस जरूर मनाती है।
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नाउ बैक टू 1947
अक्टूबर में कश्मीर राजा ने जब एक्सेशन किया, तब गिलगिट बाल्टिस्तान उससे टूटकर ऑलरेडी पाकिस्तान से मिल चुका था। विद्रोही तथा पकिस्तानी, ऑलरेडी श्रीनगर के दरवाजे पर खड़े थे।
थ्रीडी मैप देखिए। यह कटोरा दक्षिण में भारत की ओर से भी पहाड़ियों से बाधित है। याने वहां पहुचने की रोड नही थी। अंग्रेजो के दौर की रोड, पाकिस्तान होकर जाती थी, हमे उसका एक्सेस तो मिलता नहीं।
तो एयरफोर्स के जहाज से फौजी गए।
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एयरफोर्स याने सेकेंड वर्ल्ड वॉर के ब्रिटेन् के फेंके छोड़े छकड़ा प्रोपेलर प्लेन। उड़न रिक्शा समझ लीजिए। इसमे 15-20 फौजी बैठकर जाते।
श्रीनगर के कच्चे मिट्टी की हवाई पट्टी पर उतरते। 3 दिन में कुछ हजार फौजी पहुचे। तोप नही, टैंक नही, हल्के हथियार लेकर...
श्रीनगर से दुश्मन को भगाना शुरू किया। कटोरे का प्लेन तला जीत लिया। कश्मीर वैली तब से आपकी है।
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लेकिन जहां से पहाड़ियां शुरू होती है, पाकिस्तान एडवांटेज में आ जाता है।
तब तक दिसम्बर भी आ जाता है। बर्फ है, और दोनों तरफ की फौज बर्फ में लड़ने को ट्रेंड नही। सेनाध्यक्ष ( जो दोनों तरफ ब्रिटिश हैं) युद्ध विराम मांगते हैं।
जी हां, यह रिकार्ड पर है कि सेना ने युद्ध विराम मांगा, यह कहकर की सर्दियों में लड़ना सम्भव नही। तब की सरकार ने, अमेरिकन राष्ट्रपति के डर से युद्ध विराम नही किया था।
तो जहाँ युद्ध विराम हुआ, वही LOC है।
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जिसे आप POK कहते हैं, वह नीलम घाटी और मुजफ्फराबाद सहित 4 जिले, ऊपर गिलगिट बाल्टिस्तान है। इन इलाकों में हजारो पहाड़ हैं। 100 पहाड़ 1999 में जीतने में जिनको पसीना फूट गया,
आप हजारो पहाड़ 1947 में न जीतने पर स्यापा करते है।
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यह कश्मीर पाने की चिंता नही, यह घरेलू ऑडियंस के लिए खड़ा किया गया राजनीतिक नारा है।
क्योकि आंखों देखा सत्य यह है कि इस तरह की पहाड़ियों में वर्ल्ड पॉवर अमेरिका, 20 साल लड़कर अफगानिस्तान में नही जीत पाया। लाखो ड्रोन हमले, हजारो F-16 फ्लाइट्स, बड़े बम..
आप सोचते है कि मोदी शाह किसी दिन सेना के हाथ खोल दें, तो हफ्ते भर में PoK भारत का हो जायेगा।
इसलिए मैं हैशटैग #चूकादे का यूज करता हूँ।
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मसले का समाधान क्या है।
एक ही है।
यह 1 साल बाद हो, 10 साल बाद, 100 या 1000 साल बाद। यही होगा..
कि LOC बॉर्डर बनेगी। भारतीय कश्मीर कभी पाकिस्तान का नही होगा, और PoK कभी भारत का नही होगा।
मसला सुलझने पर पाक आर्मी का पाकिस्तान में महत्व घटेगा। दो देशों की टेंशन्स रिड्यूज होंगी। ट्रेड, टूरिज्म, पीपुल टू पीपुल कॉन्टेक्ट होगा। बार्डर वैसे ही इर्रिलेवेट हो जाएंगे जैसे स्विट्जरलैंड और बेल्जियम के बीच है।
बस कार उठाओ, इस पार-उस पार घूमते रहो।
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यह जब भी होगा, भारत पाक की आपसी, द्विपक्षीय सहमति से होगा। यहां हथियार बेचकर धन और प्रभुत्व कमाने वाला अमेरिका, और पाकिस्तान को हमारे लिए दूसरा मोर्चा बनाकर रखने का इच्छुक चीन,
कभी नही चाहेंगे कि शांति हो। समाधान हो।
तो #चूकादे से जो लोग दिन रात हिन्दू, मुसलमान, पाकिस्तान, PoK, मार देंगे, जान दे देंगे के नारो और युद्ध मे देशभक्ति खोजते है, वे बेसिकली अमेरिका और चीन के हित पूरे करते हैं।
वही नही, ऐसी सरकारे भी चीन और अमेरिका के हित ही पूरे करती हैं। फिर उनसे कर्जे लेती है, अपनों को ठेके दिलवाती है।
उनके मुकदमो में फेवरेबल फैसले भी दिलवाती है।
●●
अब देशभक्तों से सवाल यह है कि आप किसकी तरफ हैं??
भारत के..
या चीन और अमेरिका के??
टेक्नॉलजी के साथ इस तरह के थ्रीडी मैप निकल आये है। जिससे बातों को समझना आसान हो जाता है।
राजकुमार दुबे
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