जवाबदार कौन ?
मेरे एक मित्र की भतीजी IAS एस्पिरेन्ट है।
लेकिन छोटे शहर से है।
हमने तय किया गर्मियों की छुट्टी में किसी ऐसी कोचिंग भेजा जाए, जहां उसे इस एग्जाम की तैयारियों का सम्पूर्ण खाका मिल सके।
तो भोपाल में एक अन्य रिश्तेदार के यहाँ रखकर, वहीं किसी कोचिंग में दाखिला करने की योजना बनी।
●●
एक दो कोचिंग गूगल के थ्रू खोजी, देखी। फिर एक वरिष्ठ मार्गदर्शक से सलाह ली। उन्होंने एक कोचिंग की सिफारिश की।
सिफारिश का कारण यह कि उस कोचिंग के मेंटर एक पूर्व आईएएस है, अनुभवी और अर्टिकुलेटेड पर्सन हैं।
फीस, मोडरेट है, क्योकि सेवा की दृष्टि चला रहे है, धन उद्देश्य नही। गया, देखा, कोचिंग ठीक थी। लेकिन फिलहाल फाउंडेशन कोर्स ही चला रही है।
कारण जानने की कोशिश की। काउंसलर ने मुझे कुछ तो भी, सन्तुष्टि परक बता दिया गया।
●●
लेकिन इस क्रम में मेरे वरिष्ठ मार्गदर्शक से आगे भी बात हुई। जो बात आगे समझ आयी वो यह थी..
कोचिंग में ज्यादातर युवा MPPSC का सपना लेकर आते हैं। अब ये वैकेंसी, अनियमित और बेहद कम आती है।
एग्जाम कब होंगे, ठिकाना नही।
होंगे, तो पेपर लीक।
या कोई और ऑब्जेक्शनबल अनियमितता। जिसके कारण कोई अभ्यर्थी कोर्ट में चला जायेगा। वैकेंसी, एग्जाम फिर अटक जाएंगे, या दोबारा होंगे।
कभी सब कुछ एक सिस्टम पर चलता था। हर साल एक औसत संख्या में वैकेंसी, समय पर परीक्षा, परिणाम, सफलताएं।
अब सब बिगड़ा हुआ है।
●●
तो युवाओ को सपना दिखाकर फीस लेकर 2-3 साल रगड़ना, मेहनत करना, लेकिन आगे अनिश्चितता। यह दो तीन बार के अनुभव के बाद साहब का मन, कोचिंग कराने से उचाट हो गया।
बन्द कर नही सकते, बच्चों की आशाएं जुड़ी हैं। सो नए एडमिशन, फेकल्टी, कोर्स वगैरह सीमित कर दिया है।
●●
वहीं सड़क पर घूमिए।
हर खम्भे पर एक नेता लटका है। एक दूसरे को बर्थडे की बधाई, बड़े वाले का हार्दिक अभिनंदन, जनता को फलां त्योहार की बधाई, जहां तहां विकास का दावा।
हर आदमी का डिस्कोर्स, डिस्कशन राजनीति।
राजनीति याने धर्म, हिन्दू मुसलमान, सावरकर- शिवाजी, कांग्रेस भाजपा, फेंकू पप्पू।
सब हिन्दू बने घूम रहे हैं। उन्हें जो बनना था, पैदा होते ही बन चुके है। उन्हें आगे औऱ कुछ बनना नही है।
●●
पर यह मध्यप्रदेश या भोपाल की ही हालत नही है।
उत्तर भारत की हर राजधानी, पब्लिक सर्विस कमीशन, इंट्रान्स कंपटीटिव एग्जामिनेशन में यही हालत है। लेकिन मजाल है कि कोई इस पर चर्चा सुनाई दे।
सोशल मीडिया पर इंदिरा गांधी पर डिस्कशन चल रहे हैं। टीवी खोलता हूँ तो एक राज्य की सीएम दूसरे राज्य के पूर्व सीएम को टोंटी चोर कह रही है।
एमपी के सीएम, कांग्रेस के चुनाव चिन्ह को कटा हुआ हाथ बताकर दांत निपोर रहे हैं। और 11 साल से प्रधानमंत्री पद पर बैठे, डबल ट्रिपल इंजन की सरकारो के सुप्रीमो का ताजा बयान है
कि देश के मौजूदा हालात के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है।
Comments
Post a Comment