प्रश्नोत्तर

प्रश्न -अपनी पोस्ट से आप अंग्रेजों और उनके शासन का महिमामंडन क्यों करते हैं??

उत्तर- मोहतरमा, जो सोचता हूँ, लिखता हूँ। शायद अंग्रेज मुझे पसंद हैं, इसलिए। आप नफरत कर सकतीं हैं। वो आपका अधिकार है। मेरी नफरत संघियो के लिए रिजर्व है।

बाई द वे, किस लाइन में आपकी पारखी नजर ने महिमामंडन खोज निकाला, बतायें अवश्य
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प्रश्न-  सड़कों पर साष्टांग घिसट कर चलना था, वैसे ही जैसे ये लोग अपने देवताओं के सामने घिसटते हैं। आखिर ब्रिटिश राज भी भगवान से कम था क्या?? ये क्या है सर?

ऐसे ही आप कभी कर्जन के एहसान गिनाते हैं कभी भगत सिंह और उनके साथियों द्वारा लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिए की गई जॉन पी. सॉन्डर्स की हत्या की निंदा करते हैं? इसको हम क्या समझें सर??

वैसे आपको अंग्रेज क्यों पसंद हैं,  इस को कृपया थोड़ा विस्तार से समझाएं
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उत्तर-  देवि!!ये पंक्तियां डायर की मानसिकता को बता रही है, डायर की तरफ से लिखा गया है। यह उसकी सोच पर तंज भी है। 

साहित्य पढा करें। ऐसा कन्फ्यूजन, लिटरेचर न पढ़ने की वजह से होता है।
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कर्जन का तो खैर, ताजमहल और ASI अहसानमंद है। वो योग्य, और एस्ट्यूट एडमिनिस्ट्रेटर था। भारत के इतिहास, प्राचीन कला और उसके संरक्षण के जो काम किये, वह हम हिंदुस्तानी नही कर पाए। 

कर्जन का कर्ज तो हर हिस्ट्री लवर पर है। 
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मैं कमिश्नर रैंड, कर्जन विली, जैक्सन, और साण्डर्स की हत्या की निंदा करता हूँ। जो स्वंयमसिद्ध हैं। 

रैंड प्लेग से लोगो को बचा रहा था। क्यो मारा? चचा कर्जन की जगह भतीजे कर्जन, को क्यो मारा। जैक्सन भारतीय ग्रन्थों का अनुवादक, और इंडियन्स के प्रति नरम कलेक्टर था। क्यो मारा? 

स्कॉट ने लाजपत पर लाठी चलाई थी। तो साण्डर्स को क्यो मारा। ( हालांकि ये इस लिस्ट का अकेला केस है, जो डेलिब्रेट नही, पहचान की गलती से हुआ मर्डर था)
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लेकिन आपके हिसाब से गोरी चमड़ी देखी, तो मार दो। स्टेट बैंक से कर्जा लो, पंजाब नेशनल में  चुका दो। 

गजबे देशभक्ति हो गई? 

न्याय अन्याय का कोई सेंस नही आपमे? ऐसे में मेरे से चिढ़ा कोई आदमी आपको मार दे, तो क्या मुझे ताली बजानी चाहिए?
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अंग्रेज इसलिए पसंद है क्योकि वे लॉ फुल, सिविलाइज्ड, और डेमोक्रेटिक लोग थे। 

पहले पेट भर हंस ले इस बात पर। फिर आगे बढ़ते हैं। 
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फिर स्पेनिश, जापानी, जर्मन, रूसी, फ्रेंच कलोनियल हिस्ट्री पे नजर डालते हैं। 

आपको दर्जनों जलियांवाला बाग मिलेंगे। पूरी सभ्यताएं मिटा दी गयी साउथ अमेरिका में। जापानी नरसंहारों औऱ बलात्कारों की हौलनाक लम्बी लिस्ट है। बानगी अंडमान में मिल जाएगी। 
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मोहतरमा। यदि हिंदुस्तान के माथे पे किसी यूरोपियन ताकत का गुलाम होना लिखा ही था, तो इसके लिए ब्रिटिश सबसे अच्छे कैंडिडेट थे। 

फ्रेंच, जर्मन, जापानी या स्पेनिश होते, तो रात को गांधी नेहरू तिलक को गोली मारकर, नाली में बहा दिया गया होता।

वे आपको राजमहल में बिठाकर चाय न पिलाते। सावरकर को जेल माफी पेंशन क्यो करते। 1911 में ही फायरिंग स्क्वाड निपटा देता। 
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आज का हिंदुस्तान, भौगोलिक और राजनीतिक रूप से जो है, जो एजुकेशन, इक्वलिटी, संसाधन, टेक्नोलॉजी, डेमोक्रेसी, कॉन्स्टिट्यूशन सब सुख भोग रहे है, इसकी नीव अंग्रेजो की बनाई है। 

यही हम अगर किसी फ़्यूडल स्टेट जैसे राजपूत, मुगल या मराठे से उठकर नेशन बने होते, तो 70 लड़ते झगड़ते टुकड़ो का एक उपमहाद्वीप होता। 

तो थैंक्स ब्रिटिश। 

हमे उस राह पर डाल गए, जिसपे चलने की हमारी अपनी अक्ल कभी नही थी। 

अभी भी नही है।

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