नेता वही जो पार्टी मन भाये

अरुणाचल की 90 हजार स्क्वेयर किलोमीटर जमीन चीन के कब्जे में है, लद्दाख में कोई 38 हजार स्क्वेयर किलोमीटर। कुल हुआ

128 हजार वर्ग किलोमीटर। 

स्क्वेयर फ़ीट में 1378000000000 .. हिंदी में बोले तो 138.80 करोड़ स्क्वेयर फ़ीट

या तीन करोड़, सोलह लाख, उनतीस हजार, चार सौ अठासी एकड़। 

जबरिया कब्जा की हुई। 
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इधर वक्फ के पास है, केवल 9.4 लाख एकड़। लोगो की अपनी जमीन, स्वेच्छा से दान दी हुई। 

लेकिन चीन को लाल आंख दिखाने से विलेज प्रस्फुटित होती है। वो ताकतवर है। 

हां, मुसलमान गरीब है, आपकी प्रजा है। उनकी जमीन कब्जाने से बेनिफिट मिल सकता है। नफरती मूर्खो का वोटर वर्ग आपको बहादुर समझेगा। 
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दुनिया मे दो तरह के लीडर होते है। 

एक वे, जो अपने ऊपर आश्रित को प्रोटेक्ट करते हैं। कमजोर से विनम्रता से पेश आते हैं, उसका हाथ पकड़ते हैं।

लेकिन अपने से ताक़तवर के सामने रीढ़ तानकर खड़े होते हैं। ऊंचा सर, और आंखे बेपरवाह। ऐसे नेताओं की आत्मा मजबूत होती है।
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ऐसे नेता हिंदुस्तान ने कई देखे। लेकिन अब जो ब्रीड देखते हैं, वह दूसरी तरह की है। 

जिनकी जुबान,  ताकतवर के सामने ढीली,  लिजलिजी, अस्फुट हो जाती है। उनकी रीढ़ बड़ो के दरबार मे झुकी हुई, और कमर 90 डिग्री का कोण बनाती है। 

शक्तिशाली के पैर पकड़, लल्लो चप्पो और चापलूस किस्म की बाते करके ये जब किसी कमजोर के सामने पहुचते है, तो एकदम से चाल बदल जाती है। 

वे शेर की तरह चलते हैं। दहाड़ते हैं, मजलूम का शिकार करना चाहते हैं। उसका घर ढहाना चाहते हैं, उसकी जमीन, उसके पूजास्थल और उसका आत्मसम्मान छीनना चाहते हैं। 
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उनकी ताकत कमजोर पर चलती है। इनकी आत्मा खोखली होती है। 

ऐसे खोखले नेता, शोहदों, गुंडों और सरकारी ताकत से एक खोखले गुंडानुमा नामर्द समाज, बनाते हैं। वे क्लीव राजनीतिक दल, और अपने जैसे घटिया लोगो का समूचा वोटर वर्ग का निर्माण करते हैं।
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इनके पास बहुमत है, हिम्मत नही है।

और बहुमत से तो दिल्ली के उस कबूतरखाने में बिल पास होते है। छातियों में दम नही भर पाता। जो POK पर एक प्रस्ताव न कर सके, वे जो जमीन 70 साल से कब्जे में थी, उसी का स्टेटस बदलकर शेर बने। 

अब वे जानते हैं, कि चीन से जमीन न खाली करा सकते। उस पर बात करना देशद्रोह है। मगर नया बिल बनाकर मुल्लो की प्रॉपर्टी बेच खाने का तरीका निकाल रहे हैं। 
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ये वही लोग हैं, जो अंग्रेज की लाठियों जेलों से बचकर भागे। जो ट्रम्प के टैरिफ और पुतिन की दहाड़ के आगे पेशाब कर देते हैं। 

और जो मन्दिर के उकसाउ आंदोलन के समय खतरा देख सबसे पहले पीठ दिखाकर भागे। वही नेता और उनके जमूरे, आज फिर आपके सामने ये शेर गुनगुना रहे है...

दिल्ली से बीजिंग है बहुत दूर,चलो यूँ कर लें
किसी हंसते हुए, मुल्ले को रुलाया जाए।

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