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पिंड दान

कौन कर सकता है पिंडदान क्या नियम है...? वैधानिक चेतावनी- जो जन्मना सनातनी है, पढ़ें, समझें। जो नये भगवाधारी नक्काल हिन्दू हैं, दफा हो जायें। उपाध्याय, चौबे, त्रिगुनाईत, दीक्षित, पाठक वाली श्रेणी के लोग, जो भाजपा के मेनिफेस्टो से अप्रूवल लेकर शास्त्र बांचते हैं, वे भी दूर रहें। फालतू में, रामभद्राचार्य को कोट करके बेइज्जत कर दूंगा। ●● पिंडदान की महत्ता की व्यत्पत्ति गरुण पुराण, विष्णु पुराण, वायु पुराण और महाभारत के श्लोकों से होती है। जो पण्डित हैं, ग्रन्थ पढ़े हैं, वे श्लोक खोज लेंगे। उनके लिए रेफरेन्स दे रहा हूँ। ज्येष्ठः पुत्रः पितृकर्म कुर्यात् सर्वदा नरः। अनुपस्थितौ तस्य स्यात् कनिष्ठोऽपि समान् हि॥ ( गरुड़ पुराण, प्रेतखण्ड, अध्याय 9, श्लोक 12) ज्येष्ठ पुत्र के जीवित और उपलब्ध होने पर सामान्यतः वही पिंड दान करता है। ज्येष्ठ पुत्र मृत, अनुपस्थित, असमर्थ, या सहमत हो, तो अन्य पुत्र भी यह कर्म कर सकते हैं। यह परिवार की सहमति और परंपरा पर निर्भर करता है। ●● दूसरा रेफरेन्स - विष्णु पुराण (तृतीय अंश, अध्याय 13): पुत्रः कुर्यात् पितृकर्मं ज्येष्ठः सर्वदा प्रियः। असमर्थे च तस...

परंपरा और परवरिश

राजदरबारो में एक परम्परा होती थी। राजा जब दरबार में प्रवेश करने वाला होता, उसके पहले दरबार के प्रतिहारी को सूचित कर दिया जाता। ●● तब वह उच्च स्वर में आवाज लगाता, और सभी दरबारियों या आयी हुई जनता को अटेंशन की मुद्रा में लाने के लिये महराज की अगवानी का उद्घोष करता। सावधान, सावधान, सावधान! चक्रवर्ती!!, महा-महिमाधिराज, देवानांप्रिय,  परमभट्टारक!!, विक्रमादित्य, जगद्गुरु, नरपति, धर्मरक्षक, सिंहासनाधीश्वर, सर्वभौम,... राजाधिराज, विश्वविजयी,  भूपति, नृपेंद्र,  धर्माधिपति, सहस्रबाहु, पराक्रमभट्टारक,  पृथ्वीपाल, विश्वनाथ महाराज श्री श्री मूंगफली जी महाबली ... पधार रहे है ssss प्राचीन भारत मे कुछ ऐसा होता था। ●● फिर इस्लामी आ गए। लेकिन सिस्टम वही बना रहा। तब कुछ इस तरह से आवाज आती... बा अदब, बा मुलाहिजा, होशियार.. सुल्तान-उल-हिंद  खलीफतुल्लाह, आलमगीर, जाम-ए-जमजम, अमीर- उल- मोमिनीन, दुर्रे दुर्रान, सुल्तान  पादशाह, गाजी,  ज़िल्ल-उल्लाह, जिल्लेसुभानी, खुदावंद, सुल्तान-उल-आदिल, शाह-ए-दीन, मुजाहिद,  हजरत, ख्वाजा अलफूल- उल- मसूर की दाल पधार रह...